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Emotions & Relationships

मन का जुगाली करना

मन का जुगाली करना
आपने रोकने की कोशिश की, पर वही ख़याल बार-बार वापस आता है — मन एक ही दर्दनाक पटरी पर अटका रहता है।

मन में विचारों, घटनाओं या चिंताओं को बिना किसी नतीजे पर पहुँचे बार-बार दोहराने का तरीका। यह उपयोगी समस्या-सुलझाना नहीं है। डिप्रेशन, चिंता, OCD और PTSD में यह आम है। दिमाग़ के डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क की अधिक सक्रियता इसे चलाती है।

How it works

आपके दिमाग़ का डिफ़ॉल्ट मोड नेटवर्क एक चक्कर में फँस जाता है, घटनाओं, चिंताओं या खुद की आलोचनाओं को बिना नतीजे के दोहराता रहता है। हर बार दोहराने से वह रास्ता और पक्का हो जाता है, और ख़याल और चिपकने वाला बन जाता है।

सोचें जैसे

जैसे गाय जुगाली करती है — वही चीज़ बार-बार, पचाने के लिए नहीं, बल्कि इसलिए कि जबड़ा रुकता ही नहीं।

यह कैसा लगता है

आप उसके बारे में सोचना बंद नहीं कर पाते, भले ही सोचने से कोई फ़ायदा नहीं। यह चक्कर बाहर निकलने का रास्ता नहीं देता, और 'बस रोको' कहने की कोशिश इसे और तेज़ कर देती है।