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Senses & Perception

संवेदी अधिभार

संवेदी अधिभार
आप 'बहुत संवेदनशील' नहीं हैं — आपके दिमाग़ पर एक साथ इतनी जानकारी आ रही है जितनी किसी के लिए भी संभालना मुश्किल हो।

यह वह एहसास है जब दिमाग़ पर एक साथ इतनी संवेदी जानकारी आ जाती है जितनी वह एक बार में सँभाल नहीं सकता। यह कोई चुनाव नहीं, न ही नाटक — यह एक असली न्यूरोलॉजिकल घटना है। इसके बाद अक्सर दिमाग़ बंद हो जाता है, तनाव उफन पड़ता है, या वहाँ से निकलने की तीव्र ज़रूरत होती है।

How it works

दिमाग़ हर पल ज़रूरी जानकारी को छानकर आगे भेजता है। अधिभार में वे छलनियाँ काम नहीं करतीं, या एक साथ बहुत कुछ इतनी तेज़ी से आता है कि कच्चे संकेत अनछने ढेर हो जाते हैं। तब नर्वस सिस्टम बचाव के लिए इमरजेंसी मोड में आ जाता है — लड़ो, भागो या ठहर जाओ।

सोचें जैसे

जैसे खुले मैदान में ओले पड़ रहे हों और कोई छत न हो — हर ओला सीधे लगता है, एक भी रोक नहीं सकते।

यह कैसा लगता है

लगता है जैसे आप अपने ही शरीर में क़ैद हैं, हर तरफ़ से एक साथ सब चिल्ला रहे हैं और ध्यान रखने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं है।